NCERT Class 10 English First Flight
Lesson - 1 A Letter to God
Hindi explanation
एक पहाड़ी की चोटी पर एक अकेला घर था। इतनी ऊंचाई से कोई भी नदी को और मकई के खेतो को देख सकता था जिनमे की फूल आ चुके थे। जिससे लगता था की इस बार फसल अच्छी होने वाली है। बस जमीन को जरुरत थी तो एक अच्छी बारिश की या फिर एक बौछार की। Lencho (जो की उस घर में अपने परिवार के साथ रहता था)अपने खेतो को अच्छे से जानता था उसने सुबह से कुछ नहीं किया था बस उत्तर पूर्व दिशा की तरफ आसमान में देख रहा था। और तभी अपनी पत्नी से कहता है की "इस बार हमें पानी जरूर मिलेगा। "
उसकी पत्नी जो की खाना तैयार कर रही थी उसने जवाब दिया "हाँ अगर भगवान् की दया होगी तो। "
Lencho के बड़े लड़के खेतों में काम कर रहे थे जबकि छोटे बच्चे घर के पास ही खेल रहे थे जब तक की उनकी माँ ने उन्हें खाने के लिए नहीं बुलाया। खाना कहते समय वही हुआ जो की Lencho ने सोचा था। आसमान से बारिश की बड़ी बड़ी बूँदें गिरने लगी। उत्तर पूर्व से बड़े बड़े बादल आते हुए दिख रहे थे। हवा भी बहुत ताजी और सुहानी चल रही थी। तभी Lencho उठा और बाहर निकला वह अपने शरीर पर बारिश की बूंदों का आनंद लेना चाहता था। फिर अंदर आकर वह बोला "ये बारिश की बूंदें नहीं हैं ये नए सिक्के हैं , बड़ी बूंदें 10 cent के सिक्के हैं और छोटी बूंदें 5 cent के सिक्के हैं।
पुरे संतुष्ट भाव से वह खेतों को और उनपर आये फूलों को देख रहा था जो की पूरी तरह बारिश से परदे की तरह ढक चुके थे। लेकिन तभी तेज़ हवा चलने लगी और हवा के साथ ओले भी गिरने लगे। ये नए चांदी के सिक्कों से मिलते जुलते थे। लड़के बाहर जाकर ओले इक्कठे करने लगे जो की जमे हुए मोती की तरह दिख रहे थे।
Lencho सोचने लगा ये तो बहुत बुरा हो रहा है। मुझे उम्मीद है की ये ओले गिरने जल्दी ही बंद हो जायेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ओले गिरना बंद नहीं हुए। लगभग एक घंटे तक ओले पुरे घर पर ,बगीचे पर ,खेत पर और पूरी पहाड़ी पर गिरते रहे। खेत पूरी तरह सफ़ेद हो चूका था मानों नमक से उसे ढक दिया हो। पेड़ों पर एक भी पत्ता नहीं बचा था। मकई के पौधे पूरी तरह ख़त्म हो चुके थे। पौधों पर से फूल झड़ गए थे। Lencho के मन बहुत दुखी था। जब तूफ़ान ख़त्म हो गया तो वह अपने खेतों में बीचों बीच जाकर खड़ा हो गया और अपने बच्चों से कहने लगा "अगर हमारे खेत पर टिड्डियों ने हमला किया होता तो भी कुछ तो बच जाता लेकिन इन ओलों ने तो कुछ भी नहीं छोड़ा।"
"इस साल हमारे पास मकई नहीं है।"
वह रात बहुत ही दुखभरी थी।
"हमारा सारा काम और मेहनत बेकार हो गयी।"
"कोई हमारी मदद नहीं कर सकता।"
"इस साल हम भूखे रह जायेंगे। "
लेकिन उस घाटी के बीचों बीच ऐकान्त घर में रहने वाले सभी लोगों को एक उम्मीद थी - भगवान् से मदद की।
तभी Lencho कहता है की "इतना परेशान मत हो , माना की हमारा सब कुछ बर्बाद हो गया है लेकिन याद रखो की भूख से कोई नहीं मरता। "
लोग भी कहते हैं की भूख से कोई नहीं मरता।
सारी रात Lencho यही सोचता रहा की भगवान् उनकी मदद जरूर करेंगे क्यूंकि उसे बताया गया था की भगवान् सब कुछ देखता है यहाँ तक की हमारे मन में क्या है ये भी भगवान् देख लेता है। Lencho जो की अपने खेतों में बैल की तरह काम करता था ,लिखना भी जानता था। जब sunday आया तो दिन में उसने एक letter लिखना शुरू किया जिसे वह खुद ही शहर जाकर letter box में डालने वाला था। ये पत्र वो भगवान् को लिख रहा था।
उसने लिखा "God अगर आप मेरी मदद नहीं करेंगे तो मैं और मेरा परिवार इस साल भूखे ही रह जायेंगे। मुझे केवल 100 peros की जरुरत है ताकि मैं दुबारा से अपने खेत तैयार करके उसमे बीज बो सकूं और बाकी पैसों से जब तक फसल तैयार न हो तब तक अपना गुजारा कर सकूँ। क्यूंकि ओलों ने मेरी....................................."
और उसने पत्र को लिफाफे में डालकर उसपर लिख दिया "To God" और परेशान हालत में वह शहर की और चल दिया। post office पहुंच कर उसने लिफाफे पर stamp लगाया और उसको letter box में डाल दिया।
वहां पर काम करने वाले लोगों में से एक व्यक्ति जो की postman था और साथ साथ post office के कामों में भी हाथ बंटाता था , वह अपने boss के पास हँसते हँसते गया और उन्हें वो letter दिखाया जिस पर to God लिखा था। अपने अब तक के carrer में उसने ऐसा letter नहीं देखा जिसपर ऐसा address लिखा हो। उसका boss जो की postmaster था वह एक मोटा और मजाकिया व्यक्ति था वह भी जोर से हंसने लगा लेकिन तभी वह अचानक सोचने लगा। वह letter पर हाथ मारकर कहने लगा "क्या विश्वाश है !काश मुझे भगवान पर इतना विश्वाश होता जितना इस व्यक्ति को है की इसने भगवान् को ही पत्र लिख दिया।
पत्र लिखने वाले व्यक्ति का भगवान् पर से विश्वाश न टूटे इसके लिए postmaster को एक उपाय सुझा - इस पत्र का जवाब देते हैं। लेकिन जैसे ही उसने पत्र को खोला उसमे साफ़ दिख रहा था की उसका जवाब देने के लिए किसी की दया , ink और paper की जरुरत नहीं थी बल्कि उससे कुछ ज्यादा चाहिए था।postmaster अपने संकल्प में फँस गया ; तभी उसने अपने सभी कर्मचारियों से कुछ पैसे देने को कहा और उसने खुद भी अपनी salary का एक हिस्सा दिया और उसके कुछ मित्रो ने भी charity के नाम पर कुछ पैसों की मदद की।
लेकिन उसके लिए 100 peros इकठ्ठा करना नामुमकिन था। इसलिए वह केवल आधे से ज्यादा रकम इकट्ठी करके ही भेज पाया। उसने लिफाफे में पैसे डाले और उसपर Lancho का नाम लिख दिया और उसके साथ एक letter भी डाला जिसपर कुछ नहीं लिखा बस God लिखा।
अगले sunday Lencho हमेशा से थोड़ा जल्दी आ गया ये पूछने के लिए की क्या उसके लिए कोई letter आया है। उसी postman ने Lencho को लिफाफा दिया। और postmaster अपने office में बैठकर उसे देख रहा था और यह अनुभव कर रहा था की उसने एक अच्छा काम किया।
Lencho को पैसे देखकर जरा भी हैरानी नहीं हुई, यही उसका विश्वाश था - लेकिन जब उसने पैसे गिने तो उसे गुस्सा आ गया। उसे विश्वाश था की भगवान् ऐसी गलती नहीं कर सकते न ही भगवान् मेरी मांग को मना कर सकते हैं।
वह उसी समय Postoffice की खिड़की पर गया और paper और ink मांगी। और टेबल पर paper रखके लिखने लगा। लिखते समय उसका गुस्सा उसके चेहरे पर दिख रहा था क्यूंकि उसकी भौहें गुस्से से सिकुड़ रही थी। और फिर उसने खिड़की पर जाकर stamp लिया और पत्र को लिफाफे में डालकर उसे बंद कर दिया फिर stamp लगाकर उसे letter box में डाल दिया। जैसे ही उसने पत्र डाला postmaster उस लिफाफे को ले आया और खोला उसमे लिखा था " हे भगवान् मैंने जितने पैसे आप से मांगे थे उसमे से मुझे केवल 70 peros ही मिले हैं , बाकि पैसे भी जल्दी ही भेज दो क्योंकि मुझे इनकी बहुत जरुरत है। लेकिन ये पैसे mail से मत भेजना क्यूंकि postoffice के कर्मचारी बदमाश हैं। "Lencho
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